धर्म और संस्कृति

बगलामुखी माता के 10 शक्तिशाली उपाय

हे महामाये। तुम स्वाहा (देवताओं को भी पालने वाली) स्वधा (पितरेर सद्धिहानिः – का पालन करने वाला मन्त्र) वषट्‌कार स्वर (इन्द्र को यज्ञ भाग पहुँचाने वाला मन अमृत संध्या, सावित्री, संसार की जननी हो।

हे मातेश्वरी ! आप ही महा विधा, महामाया, महान, स्मृति और महामोहा हम आपकी वन्दना करते हैं।

बगलामुखी माता के 10 शक्तिशाली उपाय 

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः॥

प्रतिदिन सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें और इस बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र शत्रुओं के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करता है और आत्मबल बढ़ाता है। गुरुवार का दिन देवी बगलामुखी को अर्पित माना जाता है। इस दिन पीले फूल, चना दाल, हल्दी और गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के समय “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का 21 माला जाप अत्यंत फलदायक होता है।  बगलामुखी यंत्र की स्थापना करें। प्रतिदिन दीपक जलाएं और हल्दी का तिलक लगाएं। इससे कार्य में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और शत्रु नष्ट होते हैं। माता बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। गुरुवार के दिन गरीबों को पीले वस्त्र, हल्दी, केला, चना दाल या सोने का दान करें। यह उपाय आपको आर्थिक और मानसिक शांति प्रदान करेगा। यदि कोई व्यक्ति बार-बार बाधा डाल रहा है, तो रात्रि में शांत स्थान पर बैठकर माता का ध्यान करें और निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें:

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

यह मंत्र शत्रु की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर देता है। मां बगलामुखी की साधना सदैव पीले आसन पर बैठकर करनी चाहिए। इससे साधना शीघ्र सफल होती है और मन एकाग्र रहता है। यदि कोई व्यक्ति कोर्ट-कचहरी के मामले में फंसा है, तो उसे माता बगलामुखी के मंदिर में पीले फूल और हल्दी चढ़ानी चाहिए। साथ ही 11 दिन तक रोज़ “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का जाप करें। इससे विजय प्राप्त होती है। घर के मुख्य द्वार पर हल्दी से “ॐ” और “ह्लीं” लिखें। यह उपाय बुरी नजर, तंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। प्रत्येक कार्य से पहले माता बगलामुखी का नाम लेकर 3 बार “जय मां बगलामुखी” बोलें। यह छोटा सा उपाय आत्मविश्वास बढ़ाता है और कार्य सिद्धि सुनिश्चित करता है।  बगलामुखी मंदिर  दर्शन अवश्य करें। वहां विशेष पूजा करने से जीवन की सभी रुकावटें दूर होती हैं।

हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें माता पीताम्बरा के नाम से भी जाना जाता है।     माता बगलामुखी को पीला रंग अति प्रिय है। इनके पूजन में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीली सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन्हें ‘स्तंभन’ (बुरी शक्तियों, शत्रुओं या नकारात्मक ऊर्जा को रोकने वाली) की शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना और मंत्र जाप से कानूनी मुकदमों, शत्रुओं और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

सृष्टि रचना के बाद भगवान विधि बहुत ही व्यथित रहा करते थे। उन्हें देवताओं माँ बगः बद्दानवों का आपसी बैर सदा ही खटकता रहता था। देवता सदाचारी तथा शान्ति प्रिय थे जबकि दानवगण सदाचारियों के प्राणों के भूखे थे। वे देवताओं की अपेक्षा अधिक • प्रोमि शक्तिशाली एवम् क्रूर थे परिणामतः देवताओं की संख्या में कमी होने लगी। वे असहाय बामुखी व निर्बल होकर सृष्टि से मिटने लगे। उनकी रक्षा के लिए अब यह आवश्यक हो गया कि का मन्त्र। अमृत की खोज की जाय। इसके लिए कूटनीति के द्वारा दानवों को भी मिलाया गया। नारदजे समुद्र के मन्थन के बाद अमृत व कुल अन्य १४ अमूल्य रत्न निकले। माँ लक्ष्मी समुद्र से देवता इन ही निकली थी। भगवान विष्णु ने मोहनी का रूप धारण करके अमृत को देवताओं में बाँट दिया। उन्होंने कपट रूपधारी राहु का अपने चक्र द्वारा दो खण्ड कर दिया, किन्तु वह अमृत पान कर चुका था जिससे उसके दो रूप (राहु और केतू) हो गये।

अब देवताओं की मृत्यु का भय जाता रहा किन्तु वे इसके बाद भी दानवों से पराजित होते रहे। वृत्तासुर जैसे भयंकर दानवराज के वध के लिए महामुनि दधिचि ने अपनी अस्थियाँ भी देवताओं को दे डाली थी। उनकी हड्डी से ही वज्र बनाया गया था। जीवन दानव महान तपस्वी भी होते थे। वे अपने योगबल से भी देवगणों पर विजय पा जाते थे। ब्रह्माजी भगवान शंकर के पास गये। भगवान शंकर अपनी प्रिया पार्वती के साथ पर्वत पर विराजमान थे। देवदार के वृक्षों के नीचे उनका प्रिय वाहन नन्दी बैठा था। रह-रह कर शिवगणों के हर-हर बम-बम का स्वर गूंज उठता था।

बह्माजी को अपने यहाँ आया देखकर भगवान भूतनाथ बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने सृष्टिकर्ता को प्रणाम करके एक उच्च आसन पर बिठाया और प्रेमभाव से आगमन का कारण पूछा। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर तीनों आदि देवमाने गये हैं। तीनों की शक्तियाँ समान हैं। वे एक-दूसरे को समान आदर देते हैं। ब्रह्माजी ने कहा भगवान मैंने बहुत ही सतर्कता के साथ सृष्टि की रचना की है किन्तु दानव शक्ति के आगे ऐसा लगता है कि देव शक्तियाँ सदा अमर होते हुए भी निर्बल बनी रहेंगी। यह सुनकर भगवान शंकर हावा क्या कर सकता हूँ? आप श्री सिद्धि को कृपया हमें आदेश दें। हमारा कार्य तो सुष्टि का संहार करना है।

ब्रह्माजी ने कहा कि आप अपने प्रचण्ड स्वरूप के द्वारा असुरों को नष्ट करें शंकरजी ने कहा-प्रभो अधिकांश दैत्य दानव हमारे परम भक्त हैं वे हमारी आराधना के सदैव लीन रहते हैं। हम उनका प्रत्यक्ष रूप से कैसे अनिष्ट कर सकते हैं। हाँ, हम अपने अर्द्धनारीश्वर शक्ति रूप द्वारा दानवों की बुद्धि में परिवर्तन ला देंगे। वे उचित औ अनुचित के निराकरण करने में असमर्थ हो जायेंगे। मेरा यह शक्ति स्वरूप बगला के नाम से विश्व में प्रसिद्ध होगा।

एक बार की बात है कि असुरों के अनेकानेक प्राणघातक प्रहारों से क्षुब्ब होकर भगवान शंकर का मुख रक्तवर्ण हो गया। उनके मुख से क्रोध के कारण एक महान तेज उत्पन्न हुआ। उस तेज की ज्वाला से समस्त दिशायें व्याप्त हो गयी, उस तेत्र में सूर्य सदृश्य ज्वाला पुंज होकर सम्पूर्ण लोकों में एक अनूठा कम्पन उत्पन्न कर दिया। इसके पश्चात् वह एक स्त्री के रूप में परिणित हो गया। शिव उग्र स्वरूपा होने के कारण स्त्रीरूप देवी के शीश पर चन्द्र जटित मुकुट व ललाट पर तृतीय नेत्र था देवीने शरीर पर पीत वस्त्र धारण कर रखे थे। उनके एक हाथ में शत्रुजिह्वा और दूसरे प्रलयंकर गदा थी।

माँ बगलामुखी की स्तुति

महादेवी को नमस्कार रौद्रा, नित्या, गौरी, धात्री, ज्योत्स्नामयी चन्द्र रूपिणं देवी बगला को नमस्कार हो नमस्कार हो। कल्याणी, वृद्धि और सिद्धि रूपादेवी को ह प्रणाम करते हैं। जगप्रतिष्ठा तथा कृति स्वरूपा देवी को हम बार-बार प्रणाम करते। जो देवी समस्त जीवों में क्षुधारूप से वास करती है ऐसी शक्ति स्वरूपा देवी वर्ज्यस्थानानि- नमस्कार हो नमस्कार हो। जो सम्पूर्ण प्राणियों में लज्जा, शान्ति, श्रद्धा, कान्ति, स्मृां दया, तुष्टि तथा चैतन्य रूप से व्याप्त है उन्हें हम बार-बार प्रणाम करते हैं। जो समन इन्द्रियों तथा अखिल जीव मात्र की अधिष्ठात्री है वह ईश्वरी हम सबकी आपत्तियों दूर करके कल्याण करें।

हे महामाये। तुम स्वाहा (देवताओं को भी पालने वाली) स्वधा (पितरेर सद्धिहानिः – का पालन करने वाला मन्त्र) वषट्‌कार स्वर (इन्द्र को यज्ञ भाग पहुँचाने वाला मन अमृत संध्या, सावित्री, संसार की जननी हो।

हे मातेश्वरी ! आप ही महा विधा, महामाया, महान, स्मृति और महामोहा हम आपकी वन्दना करते हैं।

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